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'इंडियन आइडल' जीतकर भी बुरा हाल! अभिजीत सावंत बोले, काम के लिए 'दरवाजे खटखटाने पड़े'

अभिजीत सावंत! ये वो नाम है जिसने 'इंडियन आइडल' के पहले सीज़न में जीत हासिल करके पूरे देश का दिल जीता था. सोचिए, रातोंरात उन्हें ऐसी शोहरत मिली कि हर घर में उनकी पहचान बन गई, लेकिन क्या आपको पता है, इस चकाचौंध के पीछे उनके करियर में कितना स्ट्रगल छुपा था? हाल ही में अभिजीत ने एक इंटरव्यू में अपनी इस मुश्किल जर्नी के बारे में खुलकर बात की है, और यकीन मानिए, उनके खुलासे सुनकर तो हमें भी झटका लगा है!

अभिजीत ने बताया कि 'इंडियन आइडल' जीतकर उन्हें पहचान तो खूब मिली, लेकिन प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया में अपने लिए खास जगह बनाना पहाड़ चढ़ने जैसा मुश्किल था. उन्होंने सीधा-साफ कहा, "हमारे समय में यह बहुत मुश्किल था, क्योंकि इंडस्ट्री में काफी सारी पाबंदियां थीं." इसका मतलब ये हुआ कि भले ही आप कितने ही टैलेंटेड क्यों न हों, अगर इंडस्ट्री के 'सेट सिस्टम' में फिट नहीं हुए तो काम मिलना मुश्किल था. मतलब, 'टैलेंट है तो है' वाला फंडा नहीं चलता था क्या?

उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उस समय इंडस्ट्री में सब कुछ पहले से तय था, सभी सिंगर्स और म्यूजिक डायरेक्टर मौजूद थे और हर कोई अपना काम कर रहा था. और ऐसे में नए टैलेंट का घुसना यानी 'दाने-दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम' वाली कहावत बस कहावत ही रह जाती थी. अभिजीत ने अपनी हालत कुछ यूं बयां की, "फिर हम लोग आए और दरवाजा खटखटाने लगे कि कृपया हमें आने दें, हमें काम दे दें." यार, एक नेशनल रियलिटी शो का विनर होकर भी काम मांगना पड़े, ये तो शॉकिंग है बॉस!

अभिजीत ने इंडस्ट्री की एक और परत खोली. उन्होंने बताया कि रियलिटी शो के कंटेस्टेंट्स की बढ़ती पॉपुलैरिटी से पुराने सिंगर्स और म्यूजिक डायरेक्टर्स में 'इनसिक्योरिटी' बढ़ गई थी. सोचिए, जब एक नया चेहरा रातोंरात इतना बड़ा नाम बन जाए कि उसका नाम पहले से जमे-जमाए सिंगर्स से भी ऊपर निकल जाए, तो जलन तो होगी ही ना! तो क्या इसका मतलब ये हुआ कि इंडस्ट्री में टैलेंट से ज़्यादा 'कौन किसका आदमी है' ये चलता था?

दो दशकों से भी ज्यादा समय से इंडस्ट्री में होने के बावजूद, अभिजीत को आज भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है. लेकिन उन्होंने अब इससे निपटना सीख लिया है और बस अपने काम पर ध्यान देते हैं. उन्होंने कहा कि लोग ताने देते हैं और सही-गलत बताते हैं, लेकिन इन सबके बाद भी अपने दिमाग को सही रखना पड़ता है. सही बात है, ये फिल्मी दुनिया ऐसी ही है, कभी सिर पर बिठाती है तो कभी ज़मीन पर ला पटकती है, पर हिम्मत नहीं हारनी चाहिए.

मज़े की बात ये है कि 'इंडियन आइडल' जीतने के बाद जब प्लेबैक में बात नहीं बनी, तो अभिजीत 'बिग बॉस मराठी' और 'सेलिब्रिटी मास्टरशेफ' जैसे शोज में भी नज़र आए. खुद अभिजीत ने इस पर कहा कि लोग उन्हें सिंगर से ज्यादा 'टेलीविजन पर्सनैलिटी' मानने लगे थे. अब इसमें उनकी क्या गलती, जब एक जगह काम नहीं मिला तो दूसरी जगह तो हाथ आजमाना ही पड़ेगा ना! उन्होंने ये भी माना कि 'इंडियन आइडल' से मिली पॉपुलैरिटी की वजह से ही वो इतनी सारी चीज़ें कर पाए.

आजकल अभिजीत 'इंडियन आइडल लेजेंड्स रिटर्न' में दिख रहे हैं, और अपनी इस पूरी जर्नी को देखकर हमें लगता है कि वाकई, हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती. एक रियलिटी शो का ताज जीतने के बाद भी अगर किसी को इतना संघर्ष करना पड़े, तो सोचने वाली बात है कि क्या इन शोज से निकले टैलेंट को इंडस्ट्री में सही राह मिलती है? या फिर सिर्फ शोहरत देकर उनके हाथ छोड़ दिए जाते हैं? आपका क्या ख़्याल है?

सार्वजनिक स्रोतों, विकिपीडिया, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और टिकटॉक से जानकारी के साथ।